Friday, August 25, 2023

झूठा दिखावा इंसान को पहले थका देता है और फिर मार डालता है।"

 एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था ।


उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और संतुष्ट होकर रहते थे।


एक दिन एक वैज्ञानिक अपनी बेटी के साथ उसी जंगल में शोध करने के लिए आया। अपना तम्बू लगाने के बाद वैज्ञानिक पौधों के नमूने इकट्ठा करने के लिए बाहर निकला ।


लेकिन लड़की तम्बू की सुंदरता को देखकर रुक गयी। उसने पहले ज़मीन पर एक पुराना कालीन रखा और उस पर एक बिस्तर बिछाया। तम्बू के बीच लालटेन लटकाई और उसके नीचे एक छोटी मेज़ और सफेद सेब से भरा कटोरा  रख दिया। 


वह सेब देखने में बहुत ताज़ा, खुबसूरत और बड़े  लग रहे थे। 


सारे बन्दर लालच से उस कृत्रिम सेब को पेड़ों पर बैठे देख रहे थे। 


तम्बू के सामने जगह साफ करने के लिए लड़की बाहर निकली,तब एक बंदर ने तेज़ी से झपटा मारा और एक कृत्रिम सेब उठा लिया ।तभी उसी समय लड़की की नज़र भी उस पर पड़ गयी, लड़की ने तुरंत बंदूक उठाकर निशाना लगाया और गोली दाग दिया, लेकिन सभी बंदर इतनी देर में वहां से भाग गए।


काफी देर के बाद सारे बन्दर रुक गए जब उन्होंने देखा कि अब उनका कोई पीछा नहीं कर रहा है। 


चोर बंदर ने हाथ उठाकर सबको सेब दिखाया। सभी बंदर हैरत से और ललचाई नज़र से उस बंदर को देखने लगे कि उसे कितना अच्छा सेब मिला है ।सभी इस कृत्रिम सेब को हाथ लगाने की कोशिश करने लगे।


चोर बंदर ने सबको फटकार कर ये कृत्रिम सेब लिया और एक पेड़ की सबसे ऊंची शाख पर जाकर सेब खाने के लिए मुंह में दबा दिया।


 कृत्रिम सेब बेहद कड़े प्लास्टिक से बना था । बंदर के दांतों में चबाने से दर्द शुरू हो गया। बंदर ने दो तीन बार और कोशिश की लेकिन हर बार दर्द होने लगा।


उस दिन चोर बंदर ने पेड़ की उसी शाखा पर भूखा रहकर गुज़ारा । अगले दिन वह पेड़ से नीचे आया ।


सभी बंदरों ने उसे सम्मान से देखा, क्योंकि उसके हाथ में वो कृत्रिम सेब मौजूद था। दूसरे बंदरों से मिलने वाला सम्मान को देखकर चोर बंदर ने सेब पर पकड़ मज़बूत बना ली। 


अब दूसरे बंदर फलों की तलाश में निकले और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक कूद कर फल तोड़ तोड़कर खाने लगे।


चोर बंदर के एक हाथ में  कृत्रिम सेब था,इसलिए वो पेड़ पर नहीं चढ़ सका। वो सेब को हाथ से नहीं छोड़ना चाहता था इसलिए वह दिन भर भूखा प्यासा रहा और यही सिलसिला आगे कुछ दिन तक चलता रहा। 


हालांकि दूसरे बंदर उसके हाथ में कृत्रिम सेब देखकर उसका सम्मान करते लेकिन उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं देते।


चोर बंदर भूख से इतना निढाल हो गया था कि अब उसे अपना आखिरी वक़्त नज़र आने लगा। उसने एक बार फिर उस सेब को खाने की कोशिश की लेकिन इस बार नतीजा अलग नहीं था। उसके दांत इस बार भी दर्द कर रहे थे ।


 चोर बंदर को आँखों के सामने पेड़ों से लटका हुआ फल दिखाई दे रहा था। लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इन पेड़ों पर चढ़ सके। धीरे धीरे उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गई। जैसे ही उसकी जान निकली कृत्रिम सेब पर पकड़ ढीली होने से वो उसके हाथ से बाहर लुढ़क गया।


शाम को बाकी बंदर, मरे बंदर के पास आए, कुछ आंसू बहाये और उसके शरीर को पत्तों से ढक दिया। जब वो ये कर रहे थे तब एक और बंदर को एक कृत्रिम सेब मिला और उसने अपना हाथ  ऊँचा कर के सभी बंदरो को सेब दिखाना शुरू कर दिया।

.........


दुनिया की मिसाल इस प्लास्टिक के सेब की तरह है, इससे कुछ नहीं मिलता। जबकी इसे देखने वाले प्रेरित होते रहते हैं और दुनिया को हाथ में रखने का दावेदार आख़िर में ख़ाली हाथ इस दुनिया से चला जाता है। कोई और आकर उसकी दुनिया पर क़ब्ज़ा कर लेता है।


"झूठा दिखावा इंसान को पहले थका देता है और फिर मार डालता है।"

Tuesday, July 25, 2023

समाचार निर्देश द्वारा द्वारका दिल्ली में किया गया भव्य कवि सम्मेलन।





 द्वारका दिल्ली । ।समाचार निर्देश के निदेशक आयोजक श्री मुकेश कुमार भोगल,सम्पादक कवयित्री सीमा रंगा इन्द्रा एवं सह सम्पादक डा.नाथू लाल लोटवाड़ा रहे  । कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने समाँ बांधा।अपनी प्रस्तुतियों द्वारा लोगों का मन मोह लिया ।कवियों का काव्य पाठ इतना मोहक था कि श्रोता स्थान पर बने रहे।कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्री सुरजीत जी आज़ाद,विशिष्ट अतिथि देवयानी मुखर्जी,डा.तरूणा सचदेवा,सुनील शर्मा रहे।पंजाब,हिमाचल प्रदेश, राजस्थान,उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश, दिल्ली,हरियाणा से कवि सम्मेलन में हिस्सा लिया।

कवि सम्मेलन का लाइव प्रसारण समाचार निर्देश के स्टुडियो द्वारा किया गया ।समाज सेवी श्री मुकेश कुमार भोगल ने कवि सम्मेलन का आयोजन सुपुत्री तनु श्री भोगल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में किया।भोगल जी समय समय पर ऐसे आयोजन करवाते चले आ रहें है । कार्यक्रम की शुरुआत हेमंत कुमार जी द्वारा गणेश वंदना और सरस्वती वंदना से हुई।सम्मेलन में सुप्रसिद्ध कवयित्री सीमा रंगा ने ‘मेरे सनम मेरे हमदम,डा.नाथू लाल लोटवाड़ा ने ग़ज़ल बहुत टूटा हुआ हूँ मैं ‘ , वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम सागर ने ‘मेरे वतन ‘देश प्रेम की ग़ज़ल ,मनोज फगवाड़िया ने मोहब्बत नाम मेरा,पवन शर्मा ने गीत ,शकुंतला शकुन ने लक्ष्मण शक्ति,अशोक भारद्वाज ने प्रेम मुक्तक,डा.संगीता शर्मा ने स्त्री विमर्श,गीता राघव ने भोर की किरण,रामेश्वर देव ने ग़ज़ल मेरा वो ध्यान रखता है,राधे स्याम मेहरा ने पड़ोसन की तरुणाई,सिंह भदोरिया ने हिंसा,मनोज मधुर ने प्रेम ,जय सिंह जीत ने प्रेम ग़ज़ल,आलोक अजनबी ने ज़रूरत क्या है,सुरेंद्र सागर ने प्रेम ग़ज़ल,राज ख्यालिया ने सामयिक विषय,डा.स्मर्ति कुलश्रेष्ठ ने प्रेम मुक्तक,सोनू संजीदा ने ग़ज़ल,ख़ुशबू जैन ने प्रेम मुक्तक,साहिल सिगला ने मुक्तक,निशु नागपाल ने शेर,संगीता गीत ने मुक्तक,रश्मि श्री ने नारी सशक्तिकरण,डा.चन्द्र दत्त ने हास्य पीयूष गोयल ने पुस्तकों का अनावरण ,कमलेश कुमार ने हास्य व्यंग्य,राजपाल कुंज पुरा ने प्रेम ग़ज़ल ,कौशल समीर ने शेर सुनाकर सबका मन मोह लिया। रामेश्वर देव करनाल जी द्वारा मुकेश कुमार  जी का सम्मान  अंगवस्त्र से किया गयाकवि सम्मेलन मंच संचालन डा.नाथू लाल लोटवाड़ा ने किया।श्री मुकेश कुमार भोगल ने सभी का धन्यवाद किया एवं भविष्य में ऐसे खूबसूरत आयोजन करवाने का वादा किया ।




Wednesday, March 8, 2023

होली पर्व क्या है ? क्या एक महिला के जलने का उत्सव है होली?!! #holi सत्य जाने.

 होली पर्व क्या है ? क्या एक महिला के जलने का उत्सव है होली?!! सत्य जाने. 

वास्तव मे इस पर्व का प्राचीनतम नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है।


क्योंकि

तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष) अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह।

अर्थात्―तिनके की अग्नि में भुने हुए (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं। यह होलक वात-पित्त-कफ तथा श्रम के दोषों का शमन करता है।

Holi―किसी भी अनाज के ऊपरी पर्त को होलिका कहते हैं-जैसे-चने का पट पर (पर्त) मटर का पट पर (पर्त), गेहूँ, जौ का गिद्दी से ऊपर वाला पर्त। इसी प्रकार चना, मटर, गेहूँ, जौ की गिदी को प्रह्लाद कहते हैं। होलिका को माता इसलिए कहते हैं कि वह चनादि का निर्माण करती *(माता निर्माता भवति)* यदि यह पर्त पर (होलिका) न हो तो चना, मटर रुपी प्रह्लाद का जन्म नहीं हो सकता। जब चना, मटर, गेहूँ व जौ भुनते हैं तो वह पट पर या गेहूँ, जौ की ऊपरी खोल पहले जलता है, इस प्रकार प्रह्लाद बच जाता है। उस समय प्रसन्नता से जय घोष करते हैं कि होलिका माता की जय अर्थात् होलिका रुपी पट पर (पर्त) ने अपने को देकर प्रह्लाद (चना-मटर) को बचा लिया।

 अधजले अन्न को होलक कहते हैं। इसी कारण इस पर्व का नाम होलिकोत्सव है और बसन्त ऋतुओं में नये अन्न से यज्ञ (येष्ट) करते हैं। इसलिए इस पर्व का नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है। यथा―वासन्तो=वसन्त ऋतु। नव=नये। येष्टि=यज्ञ। इसका दूसरा नाम नव सम्वतसर है। मानव सृष्टि के आदि से आर्यों की यह परम्परा रही है कि वह नवान्न को सर्वप्रथम अग्निदेव पितरों को समर्पित करते थे। तत्पश्चात् स्वयं भोग करते थे। हमारा कृषि वर्ग दो भागों में बँटा है―(1) वैशाखी, (2) कार्तिकी। इसी को क्रमश: वासन्ती और शारदीय एवं रबी और खरीफ की फसल कहते हैं। फाल्गुन पूर्णमासी वासन्ती फसल का आरम्भ है। अब तक चना, मटर, अरहर व जौ आदि अनेक नवान्न पक चुके होते हैं। अत: परम्परानुसार पितरों देवों को समर्पित करें, कैसे सम्भव है। तो कहा गया है–

अग्निवै देवानाम मुखं अर्थात् अग्नि देवों–पितरों का मुख है जो अन्नादि शाकल्यादि आग में डाला जायेगा। वह सूक्ष्म होकर पितरों देवों को प्राप्त होगा।

हमारे यहाँ आर्यों में चातुर्य्यमास यज्ञ की परम्परा है। वेदज्ञों ने चातुर्य्यमास यज्ञ को वर्ष में तीन समय निश्चित किये हैं―(1) आषाढ़ मास, (2) कार्तिक मास (दीपावली) (3) फाल्गुन मास (होली) यथा फाल्गुन्या पौर्णामास्यां चातुर्मास्यानि प्रयुञ्जीत मुखं वा एतत सम्वत् सरस्य यत् फाल्गुनी पौर्णमासी आषाढ़ी पौर्णमासी अर्थात् फाल्गुनी पौर्णमासी, आषाढ़ी पौर्णमासी और कार्तिकी पौर्णमासी को जो यज्ञ किये जाते हैं वे चातुर्यमास कहे जाते हैं आग्रहाण या नव संस्येष्टि।

आप प्रतिवर्ष होली जलाते हो। उसमें आखत डालते हो जो आखत हैं–वे अक्षत का अपभ्रंश रुप हैं, अक्षत चावलों को कहते हैं और अवधि भाषा में आखत को आहुति कहते हैं। कुछ भी हो चाहे आहुति हो, चाहे चावल हों, यह सब यज्ञ की प्रक्रिया है। आप जो परिक्रमा देते हैं यह भी यज्ञ की प्रक्रिया है। क्योंकि आहुति या परिक्रमा सब यज्ञ की प्रक्रिया है, सब यज्ञ में ही होती है। आपकी इस प्रक्रिया से सिद्ध हुआ कि यहाँ पर प्रतिवर्ष सामूहिक यज्ञ की परम्परा रही होगी इस प्रकार चारों वर्ण परस्पर मिलकर इस होली रुपी विशाल यज्ञ को सम्पन्न करते थे। आप जो गुलरियाँ बनाकर अपने-अपने घरों में होली से अग्नि लेकर उन्हें जलाते हो। यह प्रक्रिया छोटे-छोटे हवनों की है। सामूहिक बड़े यज्ञ से अग्नि ले जाकर अपने-अपने घरों में हवन करते थे। बाहरी वायु शुद्धि के लिए विशाल सामूहिक यज्ञ होते थे और घर की वायु शुद्धि के लिए छोटे-छोटे हवन करते थे दूसरा कारण यह भी था।

ऋतु सन्धिषु रोगा जायन्ते―अर्थात् ऋतुओं के मिलने पर रोग उत्पन्न होते हैं, उनके निवारण के लिए यह यज्ञ किये जाते थे। यह होली शिशिर और बसन्त ऋतु का योग है। रोग निवारण के लिए यज्ञ ही सर्वोत्तम साधन है। अब होली प्राचीनतम वैदिक परम्परा के आधार पर समझ गये होंगे कि होली नवान्न वर्ष का प्रतीक है।

पौराणिक मत में कथा इस प्रकार है―होलिका हिरण्यकश्यपु नाम के राक्षस की बहिन थी। उसे यह वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यपु का प्रह्लाद नाम का आस्तिक पुत्र विष्णु की पूजा करता था। वह उसको कहता था कि तू विष्णु को न पूजकर मेरी पूजा किया कर। जब वह नहीं माना तो हिरण्यकश्यपु ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को आग में लेकर बैठे। वह प्रह्लाद को आग में गोद में लेकर बैठ गई, होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया। होलिका की स्मृति में होली का त्यौहार मनाया जाता है जो नितान्त मिथ्या है।इसलिए आओ सब मिलकर अपने इस पवित्र पर्व को इसके वास्तविक स्वरूप मे मनाये। 

संकलन कर्ता - एम सी योगी 

Monday, February 27, 2023

मंगेतर

सच्ची घटना 


यू पी प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके की रहने वाली आरती मौर्य की शादी नजदीक के ही गांव के अवधेश से तय हुई थी | 8 दिसंबर को बारात आनी थी | दोनों ही घरों में शहनाइयां बज रही थीं | परिवार के सदस्य और दूसरे मेहमान तैयार हो रहे थे, तभी दोपहर 1.00 बजे के करीब एक छोटे बच्चे को बचाने के चक्कर में दुल्हन आरती का पैर फिसल गया और वह छत से नीचे गिर गई | उसकी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह टूट गई | कमर और पैर समेत शरीर के दूसरे हिस्सों में भी चोट आई | 

डॉक्टरों ने जब यह बताया कि फिलहाल वह अपंग हो गई है और कई महीने तक बिस्तर से नहीं हिल सकती तो सभी के होशउड़ गए | आरती के घर वाले और दूसरे लोगों को लगा कि लड़के वाले अब शादी तोड़ देंगे, क्योंकि इलाज के बावजूद उसके पूरी तरह ठीक होने की उम्मीद भी थोड़ी कम थी | परिवार वालों ने दूल्हे अवधेश और उसके घर वालों को दुल्हन आरती की छोटी बहन से शादी का ऑफर दिया, लेकिन उस वक्त दूल्हे अवधेश नेजो फैसला लिया, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी | किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि साधारण से परिवार का सामान्य सा नज़र आने वाला अवधेश जो कदम उठाएगा, वह उनकी सोच से परे होगा | अवधेश ने कहा कि वह इस हालत में भी न सिर्फ आरती को पत्नी के तौर पर अपनाएगा, बल्कि शादी भी उसी दिन तय वक़्त परकरेगा | इसके बाद वह ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम के सहारे इलाज करा रही आरती की मांग भरना चाहता था | अवधेश की जिद पर डाक्टरों की टीम से परमीशन लेकर आरती को दो घंटे बाद एम्बुलेंस से वापस घर लाया गया | उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर शादी की रस्में अदा की गईं | ऑक्सीजन और ड्रिप लगी होने की सूरत मेंही उसकी मांग भरी गई | आम दुल्हनों की तरह आरती की भी विदाई हुई | यह अलग बात है कि ससुराल जाने के बजाय वह वापस अस्पताल लाई गई | अगले दिन होने वाले ऑपरेशन के फॉर्म पर खुद अवधेश ने पति के तौर पर दस्तखत किए,अवधेश  के विचारो को नमन । भगवान से प्रार्थना करते हैं कि अवधेश जी की पत्नी अति शीघ्र स्वस्थ हो।

Friday, February 24, 2023

अच्छी टीचर। Good teacher।

 वह मल्लापुरम केरल में एक अच्छी मैथ्स टीचर थी ...


एक दिन 

उसकी स्टूडेंट ने रेलवे स्टेशन के पास भीख मांगते हुए देखा .... लेकिन वह ठीक से पहचान नहीं पाई ... लेकिन जैसे ही स्टूडेंट ने जाकर देखा कि वह उसकी क्लास टीचर है। .... जब उसने उसके बारे में पूछा ... उसने कहा कि मेरे सेवानिवृत्त होने के बाद मेरे बच्चों ने मुझे छोड़ दिया और उनके जीवन के बारे में  वह नहीं जानते .... इसलिए वह रेलवे स्टेशन के सामने भीख मांगने लगी ..... फिर छात्रा रो पड़ी और उसे अपने घर ले गई और अच्छी पोशाख दी और खाने के लिए और उसके भविष्य की योजना के लिए  हर दोस्त से संपर्क किया, जिन छात्रों को उन्होंने पढ़ाया था... और उसे रहने के लिए एक बेहतर जगह पर ले गई.... खुद के बच्चों ने उसे छोड़ दिया .. .लेकिन जिन बच्चों को उसने पढ़ाया था, उन्होंने नहीं छोड़ा .... 

यही गुरु शिष्य परम्परा की महानता है ...।

Wednesday, February 22, 2023

योग्यता दबती नहीं talent hunt

 योग्यता को कोइ दबा नही सकता,

जैसे कोई सूरज को छुपा नहीं सकता।

चाह के हजार कोशिश करले कोइ

फूक से पत्थर उड़ा नही सकता।

🖊️ एम सी योगी 9354666466



Tuesday, February 21, 2023

तलाक केस ! Divorce Case

 पति ने पत्नी को किसी बात पर थप्पड़ जड़ दिया तो पत्नी ने भी इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ फेंका। सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।

मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहीन समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया।  न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है और न पतिव्रता।

लड़के ने लड़की के बारे में और लड़की ने लड़के के बारे में कई असुविधाजनक बातें कही।

मुकदमा Divorce Case दर्ज कराया गया। पति ने पत्नी की चरित्रहीनता का तो पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया। छह साल तक शादीशुदा जीवन बीताने और एक बच्ची के माता-पिता होने के बाद आज दोनों में तलाक हो गया।

पति-पत्नी के हाथ में तलाक के कागज़ों की प्रति थी।

दोनों चुप थे, दोनों शांत, दोनों निर्विकार।

मुकदमा दो साल तक चला था।

अंत में वही हुआ जो सब चाहते थे यानी तलाक ................

यह केवल संयोग ही था कि दोनों पक्षों के रिश्तेदार एक ही दुकान में बैठ गए थे।  सब को कोल्ड ड्रिंक्स पीनी थी।

यह भी केवल संयोग ही था कि तलाकशुदा पति-पत्नी एक ही मेज़ के आमने-सामने जा बैठे।

लकड़ी की बेंच और वो दोनों .

"बधाई हो .... आप जो चाहते थे वही हुआ ....'' स्त्री ने कहा।

''तुम्हें भी बधाई ..... तुमने भी तो तलाक दे कर जीत हासिल की ....'' पुरुष बोला।

''तलाक क्या जीत का प्रतीक होता है?'' स्त्री ने पूछा।

''तुम बताओ?''

पुरुष के पूछने पर स्त्री ने जवाब नहीं दिया, वो चुपचाप बैठी रही, फिर बोली, ''तुमने मुझे चरित्रहीन कहा था....

अच्छा हुआ.... अब तुम्हारा चरित्रहीन स्त्री से पीछा छूटा।''

''वो मेरी गलती थी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था'' पुरुष बोला।

''मैंने बहुत मानसिक तनाव झेला है'', स्त्री की आवाज़ सपाट थी न दुःख, न गुस्सा।

''जानता हूँ पुरुष इसी हथियार से स्त्री पर वार करता है, जो स्त्री के मन और आत्मा को लहू-लुहान कर देता है... तुम बहुत उज्ज्वल हो। मुझे तुम्हारे बारे में ऐसी गंदी बात नहीं करनी चाहिए थी। मुझे बेहद अफ़सोस है, '' पुरुष ने कहा।

स्त्री चुप रही, उसने एक बार पुरुष को देखा।

कुछ पल चुप रहने के बाद पुरुष ने गहरी साँस ली और कहा, ''तुमने भी तो मुझे दहेज का लोभी कहा था।''

''गलत कहा था''.... पुरुष की ओऱ देखती हुई स्त्री बोली।

कुछ देर चुप रही फिर बोली, ''मैं कोई और आरोप लगाती लेकिन मैं नहीं...''

प्लास्टिक के कप में चाय आ गई।

स्त्री ने चाय उठाई, चाय ज़रा-सी छलकी। गर्म चाय स्त्री के हाथ पर गिरी।

स्सी... की आवाज़ निकली।

पुरुष के गले में उसी क्षण 'अरे...' की आवाज़ निकली। स्त्री ने पुरुष को देखा। पुरुष स्त्री को देखे जा रहा था।

''तुम्हारा कमर दर्द कैसा है?''

''ऐसा ही है कभी वोवरॉन तो कभी काम्बीफ्लेम,'' स्त्री ने बात खत्म करनी चाही।

''तुम एक्सरसाइज भी तो नहीं करती।'' पुरुष ने कहा तो स्त्री फीकी हँसी हँस दी।

''तुम्हारे अस्थमा की क्या कंडीशन है... फिर अटैक तो नहीं पड़े????'' स्त्री ने पूछा।

''अस्थमा।डॉक्टर ने स्ट्रेन... मेंटल स्ट्रेस कम करने को कहा है, '' पुरुष ने जानकारी दी।

स्त्री ने पुरुष को देखा, देखती रही एकटक। जैसे पुरुष के चेहरे पर छपे तनाव को पढ़ रही हो।

''इनहेलर तो लेते रहते हो न?'' स्त्री ने पुरुष के चेहरे से नज़रें हटाईं और पूछा।

''हाँ, लेता रहता हूँ। आज लाना याद नहीं रहा, '' पुरुष ने कहा।

''तभी आज तुम्हारी साँस उखड़ी-उखड़ी-सी है, '' स्त्री ने हमदर्द लहजे में कहा।

''हाँ, कुछ इस वजह से और कुछ...'' पुरुष कहते-कहते रुक गया।

''कुछ... कुछ तनाव के कारण,'' स्त्री ने बात पूरी की।

पुरुष कुछ सोचता रहा, फिर बोला, ''तुम्हें चार लाख रुपए देने हैं और छह हज़ार रुपए महीना भी।''

''हाँ... फिर?'' स्त्री ने पूछा।

''वसुंधरा वाले फ्लैट की कीमत तो बीस लाख रुपए होगी??? मुझे सिर्फ चार लाख रुपए चाहिए....'' स्त्री ने स्पष्ट किया।

''बिटिया बड़ी होगी... सौ खर्च होते हैं....'' पुरुष ने कहा।

''वो तो तुम छह हज़ार रुपए महीना मुझे देते रहोगे,'' स्त्री बोली।

''हाँ, ज़रूर दूँगा।''

''चार लाख अगर तुम्हारे पास नहीं है तो मुझे मत देना,'' स्त्री ने कहा।

उसके स्वर में पुराने संबंधों की गर्द थी।

पुरुष उसका चेहरा देखता रहा....

कितनी सह्रदय और कितनी सुंदर लग रही थी सामने बैठी स्त्री जो कभी उसकी पत्नी हुआ करती थी।

स्त्री पुरुष को देख रही थी और सोच रही थी, ''कितना सरल स्वभाव का है यह पुरुष, जो कभी उसका पति हुआ करता था। कितना प्यार करता था उससे...

एक बार हरिद्वार में जब वह गंगा में स्नान कर रही थी तो उसके हाथ से जंजीर छूट गई। फिर पागलों की तरह वह बचाने चला आया था उसे। खुद तैरना नहीं आता था लाट साहब को और मुझे बचाने की कोशिशें करता रहा था... कितना अच्छा है... मैं ही खोट निकालती रही...''

पुरुष एकटक स्त्री को देख रहा था और सोच रहा था, ''कितना ध्यान रखती थी, स्टीम के लिए पानी उबाल कर जग में डाल देती। उसके लिए हमेशा इनहेलर खरीद कर लाती, सेरेटाइड आक्यूहेलर बहुत महँगा था।

हर महीने कंजूसी करती, पैसे बचाती, और आक्यूहेलर खरीद लाती। दूसरों की बीमारी की कौन परवाह करता है? ये करती थी परवाह! कभी जाहिर भी नहीं होने देती थी।

कितनी संवेदना थी इसमें। मैं अपनी मर्दानगी के नशे में रहा। काश, जो मैं इसके जज़्बे को समझ पाता।''

दोनों चुप थे, बेहद चुप।

दुनिया भर की आवाज़ों से मुक्त हो कर, खामोश।

दोनों भीगी आँखों से एक दूसरे को देखते रहे....

''मुझे एक बात कहनी है, '' आवाज़ में झिझक थी।

''कहो, '' स्त्री ने सजल आँखों से उसे देखा।

''डरता हूँ,'' पुरुष ने कहा।

''डरो मत। हो सकता है तुम्हारी बात मेरे मन की बात हो,'' स्त्री ने कहा।

''तुम बहुत याद आती रही,'' पुरुष बोला।

''तुम भी,'' स्त्री ने कहा।

''मैं तुम्हें अब भी प्रेम करता हूँ।''

''मैं भी.'' स्त्री ने कहा।

दोनों की आँखें कुछ ज़्यादा ही सजल हो गई थीं।दोनों की आवाज़ भावुक और चेहरे मासूम।

'क्या हम दोनों जीवन को नया मोड़ नहीं दे सकते?'' पुरुष ने पूछा।

'कौन-सा मोड़?''

'हम फिर से साथ-साथ रहने लगें... एक साथ... पति-पत्नी बन कर... बहुत अच्छे दोस्त बन कर।''

''ये पेपर?'' स्त्री ने पूछा।

''फाड़ देते हैं।'' पुरुष ने कहा औऱ अपने हाथ से तलाक के कागजात फाड़ दिए।फिर स्त्री ने भी वही किया। दोनों उठ खड़े हुए। एक दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर मुस्कराए। दोनों पक्षों के रिश्तेदार हैरान-परेशान थे। दोनों पति-पत्नी हाथ में हाथ डाले घर की तरफ चले गए। घर जो सिर्फ और सिर्फ पति-पत्नी का था ।पति पत्नी में प्यार और तकरार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जरा सी बात पर कोई ऐसा फैसला न लें कि आपको जिंदगी भर अफसोस हो ।।

Sunday, February 19, 2023

मांसाहार क्यों न करें?! Beaf eating

 मांस क्यों नहीं खाना चाहिए।   सृष्टि में सभी जीवो को 2 वर्गों में बांटा गया है एक मांसाहारी दूसरा शाकाहारी । मांसाहारी प्राणी को प्रकृति की तरफ से सहयोगी साधन दिए गए जैसे नाखून, नुकीले दांत रात को देख लेने की क्षमता आदि और जो शाकाहारी है उनको भी इसी प्रकार से प्रकृति ने कुछ साधन दिए हैं। मांसाहार और शाकाहार में एक महत्वपूर्ण अंतर रखा गया वह है पानी को पीने की प्रक्रिया जो जीव घूंट कर पानी पीता है वह शाकाहार में रखा गया और जो जीव चाट कर पानी पीता है उसे मांसाहार की श्रेणी में रखा गया। जितने भी जीव हमारे आसपास हैं जब हम उनको इन दोनों श्रेणियों के अंतर्गत वर्गीकृत करते हैं तो हम अपने को अर्थात मनुष्य को कहां पाते हैं?! सीधी सी बात है मनुष्य शाकाहार की श्रेणी में आता है। क्योंकि मनुष्य घूंटकर पानी पीता है परंतु इस मनुष्य ने खुद को मांसाहारी beaf eater बना लिया है केवल स्वाद के लिए मांस का सेवन करने लगा है । मांसाहारी जीवो के पेट में वह सभी अम्ल व क्षार स्रावित होते हैं जो उसके शरीर में मांस को हजम करने में सहायक होते हैं। परंतु मनुष्य के शरीर में एक भी ऐसा पदार्थ स्रावित नहीं होता जो मांस को हजम कर पाए। जो मांस मनुष्य खाता है वह केवल सडकर बाहर निकल जाता है। उसका जो रस है वह शरीर ठीक से पचा नहीं पाता जिस कारण अनेकों रोग मनुष्य के शरीर में लग जाते हैं। सबसे बड़ा नुकसान मनुष्य को बुद्धि का होता है । मांस के सेवन से बुद्धि तामस से भर जाती है परिणाम स्वरूप इस प्रकार का व्यक्ति झगड़ालू ,अत्यधिक गुस्सैल और ऐसी प्रवृत्ति का हो जाता है कि वह दूसरे को मारते हुए एक क्षण के लिए भी नहीं सोचता। थोड़ा सा वर्तमान की स्थितियों में अपने जो युवा आजकल पार्टियां करते हैं मांसाहार करते हैं वही युवा लगभग अपराधों में सम्मिलित पाए जाते हैं चाहे वह अपराध मारपीट का हो चाहे वह दुष्कर्म व हत्या जैसा जघन्य अपराध हो यदि हमें समाज में इन चीजों को रोकना है तो मांसाहार को रोकना होगा क्योंकि मांसाहार के साथ-साथ नशा भी किया जाता है इन दोनों के मिश्रण से ही बड़े से बड़े अपराध होते हैं परंतु वर्तमान की सरकारों या प्रशासन का इन बातों की तरफ कोई ध्यान नहीं है। इन पर कोई रोक लगाने की योजना इनकी नहीं है क्योंकि इनके पास ऐसी शिक्षा भी नहीं है जो वह युवाओं को समझा सके कि यह काम करना है और यह नहीं करना है । प्रशासन नियम बनाकर पालन करने के लिए छोड़ देता है चाहे पब्लिक रोए, मरे जैसे मर्जी करे उसको उस नियम का पालन करना ही है । यह वास्तव में स्वतंत्रता नहीं है । हमें प्रकृति की दी गई अपनी श्रेणी को समझना होगा शाकाहार को अपनाकर अपने और अपने बच्चों को सात्विक प्रवृत्ति का बनाते हुए समाज को भी सात्विक बनाना रहेगा अन्यथा चारों तरफ तामसिक लोगों का दबदबा बढ़ता रहेगा और यह समाज के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होगा।

एम सी योगी 9354666466




Friday, February 17, 2023

महाशिवरात्रि का रहस्य

 #महाशिवरात्रि  #सत्य #प्रकाश 


आज की रात्रि ही वो रात्रि थी जिसमें मूलश्नकर जी को यह पक्का हो गया था कि जड़ पूजा की बजाय चेतन तत्व को ही पूजना है. यह एक क्रांतिकारी बदलाव था. इसी बदलाव के कारण वो सत्य प्राप्ति के पथ पर बढ़ पाए. कई वर्षो के कठोर तप और पुरुषार्थ के बाद सत्य को प्राप्त कर पाए. 

महर्षि जी ने  संसार को सार दिया कि अष्टांग योग ही सबसे सरल और एकमात्र एसा पथ है जो आत्मा को उस परम चेतन को अनुभव करा सकता है. सत्य को प्राप्त करा सकता है. 

परंतु वर्तमान का जो मनुष्य है उसे गुरुडमवाद , बाबावाद तांत्रिकबाबा वाद, झूठे धर्मवाद, धनवाद,  गुटवाद, मठवाद, बिरादरीवाद, अहमवाद, ऊँचनीचवाद, गरीब अमीरवाद आदि अनेकों झंझाव्तों, भ्रमों ने घेर रखा है. जिस कारण मनुष्य का आत्मा इन से बाहर नहीं आ पा रहा है और उस परम आनंद को प्राप्त कर पाने में असफल है. जो उपरोक्त वाद हैं उन्हीं को  सत्य और लक्ष्य मान बैठा है और उसी में चक्कर काट रहा है.

धन्य है देव दयानंद जिन्होंने उस विज्ञान को पुनर्जीवित किया जो आज भी भारतवर्ष के अंदर लाखों व्यक्तियों के जीवन को प्रकाशित कर रहा है. 

प्रभु से प्रार्थना है भारत पर  कृपा करें. अंधकार में भटकते लोगों के जीवन में प्रकाश भरें । 

हम सब अष्टांग योग का पालन करने वाले हो। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा ,ध्यान और समाधि का अभ्यास करते हुए परम शिव को प्राप्त करने वाले बने तभी महाशिवरात्रि का उद्देश्य सफल हो सकता है।


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Wednesday, February 15, 2023

यह कहानी निर्णय लेने की क्षमता को विस्तृत करती है।

  #कहानी#

बहुत थकावट हो जाने के कारण शरीर अब जवाब देने लगा था।पिछले 3 दिन से रेत में भटकते हुए रवि को दूर दूर तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा था, ना कोई जीव ना कोई पेड़ पौधा अब तो केवल यह लग रहा था कि प्राण निकल ही जाएंगे। रवि अपने साथियों से 3 दिन पहले बिछड़ गया था रास्ता भटक गया था । धूप की चमक और गर्मी धीरे-धीरे प्राणों को सुखा रही थी। रवि को अचानक से एक झोपड़ी दिखती है। पहले तो वह उसे मृगतृष्णा मान बैठता है परंतु करता क्या उसे रेत में कुछ और दिख भी नहीं रहा था जिस पर विश्वास करता। वह झोपड़ी की तरफ तेज कदमों से चल पड़ता है। पास जाकर देखता है कि वहां नल्का भी था। उसे अंदरूनी खुशी महसूस हुई, परंतु नलके की हालत देख कर के निराश भी हुआ लग रहा था कि पिछले कई सालों से शायद इस नल्के को किसी ने छुआ भी नहीं था। परंतु जैसे ही वह नल्के की हत्थी को पकड़ने के लिए नीचे झुकता है तो उसकी नजर एक नीचे पड़े कागज पर पड़ती है जो कि किसी चीज के साथ बंधा हुआ था। उसने उस कागज को उठाया तो उस पर लिखा था कि झोपड़ी के अंदर जाओ और छत से बोतल निकालकर बोतल के पानी को नल्के में डालकर भरपूर पानी पी लेना और बोतल को वापस भरकर वही रख देना किसी और के काम आएगी। इस कागज पर जो संदेश लिखा था उसको पढ़कर रवि कशमकश में पड़ गया कि वह पानी को स्वयं पी ले या फिर नल्के में डालकर जैसा उस कागज में लिखा था कि भरपूर पानी ले ले। अब उसके दिमाग में द्वंद  खड़ा हो गया। क्योंकि कई दिन से प्यास के कारण प्राण भी सूखते जा रहे थे। मन कभी करता के पानी पी ले कभी करता की नल्के में डालो। कभी सोचता कि नल्के  का क्या भरोसा कि ये चले या ना चले। जो बोतल में पानी है कहीं वह भी बेकार ना चला जाए। कभी सोचता कि अगर नलका चल जाएगा तो वह पानी पी भी लेगा और उस बोतल को दोबारा भर भी देगा। तभी अचानक ही उसके अंदर से आवाज आती है कि  पानी की बोतल नल्के में उड़ेल कर उसे दोबारा भरकर रखने वाला निर्णय ज्यादा ठीक है, तो उसने बिना समय गवाएं पानी की बोतल में से पानी नल्के में डाल दिया और उसकी  हत्थी को पकड़कर जोर जोर से चलाने लगा।। कुछ देर तक नल्के से पानी नहीं आया उसे लगने लगा कि शायद उसने गलत निर्णय ले लिया है, परंतु वह हत्थी को चलाता गया। थोड़ी देर बाद कुछ बूंदे पाने की नल्के से गिरी तो उसकी उम्मीद बंधी उसने हत्थी को और तेजी से चलाना शुरू किया तो नल्के के पाइप से पानी पूरा भर के बाहर आने लगा। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था थोड़ी देर चलाने के बाद पानी साफ हो गया और उसने भरपूर पानी पिया अच्छे से पानी पीकर, नहा भी लिया। तृप्त होकर उसने उस बोतल को दोबारा भरके उसी छत में जहां से उसने उस बोतल को उठाया था रखने के लिए चल पड़ा। जैसी वह बोतल को रखने लगा तो वहां पर कागज और पेन भी देखता है। उसने बोतल को रखा और कागज निकालकर उस पेन से उसने उसमें एक बात लिखी कि "इस बोतल को विश्वास करके नल्के में डालो और भरपूर पानी पीकर इस बोतल को दोबारा रखना ना भूलना ताकि यह किसी भटके हुए राही के काम आए, जैसे आपके आया है। 


दोस्तों यह कहानि हमें विश्वास करना सिखाती है। यदि वह राही उस लिखे हुए पर विश्वास ना करता तो शायद वह भरपूर पानी प्राप्त नहीं कर सकता था। दूसरी बात इस कहानी में निर्णय लेने की क्षमता की  कि वह बोतल का पानी नल्के में डालकर पिए या फिर बोतल से सीधा पानी पिए । यह निर्णय भी उसका एक टर्निंग प्वाइंट था। दोस्तों जीवन में बहुत  जगह कई समय पर ऐसा होता है कि हम दोराहे पर खड़े हो जाते हैं कि अब क्या किया जाए? यह किया जाए या वह किया जाए? तो तुरंत अपने अंतरात्मा की आवाज को ही सुनना चाहिए, जब इस प्रकार से निर्णय लिया जाएगा वह सबके लिए कल्याण कारक होता है। दोस्तों एसी ही प्रेरक कहानियों के लिए हमारे से जुड़े रहें। कहानी अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें 🙏

🖊️एम सी योगी 9354 666 466, 9416244447

सुब्रत रॉय सहारा को नहीं मिला अंत में सहारा

  सुब्रत रॉय सहारा देश के जाने माने अमीर आदमी सहारा ग्रुप के मालिक। सुब्रत रॉय ने 2004 में जब अपने बेटों की शादी की तो करीब 500 करोड़ रुपये ख...